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Friday, 24 November 2017

Osho Hindi Prawachan ||पाप और पुण्य || Paap or Punya||osho hindi sppech

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Unknown Uncategorized November 24, 2017



कोई धर्म के संबंध में पूछ रहा था। उससे मैंने कहा, 'धर्म का संबंध इससे नहीं है कि आप उसमें विश्वास करते हैं या नहीं करते। वह आपका विश्वास नहीं,आपका श्वास-प्रश्वास होतो ही सार्थक है। वह तो कुछ है- जो आप करते हैं या नहीं करते हैं- जो आप होते हैं,या नहीं होते हैं। धर्म कर्म है वक्तव्य नहीं।'
और धर्म कर्म तभी होता हैजब वह आत्मा बन गया हो। जो आप करते हेंवह आप पहले हो गया होते हें। सुवास देने के पहले फूल बन जाना आवश्यक है। फूलों की खेती की भांति आत्मा की खेती भी करनी होती है। औरआत्मा में फूलों को जगाने के लिए पर्वतों पर जाना आवश्यक नहीं है। वे तो जहां आप हैंवहीं उगाये जा सकते हैं। स्वयं के अतिरिक्त एकांत में ही पर्वत हैं और अरण्य हैं।
यह सत्य है कि पूर्ण एकांत में ही सत्य और सौंदर्य के दर्शन होते हैं। और जीवन में जो भी श्रेष्ठ है
वह उन्हें मिलता हैजो अकेले होने का साहस रखते हैं। जीवन के निगूढ़ रहस्य एकांत में ही अपने द्वार खोलते हैं। और आत्मा प्रकाश को और प्रेम को उपलब्ध होती है। और जब सब शांत और एकांत होता हैतभी वे बीज अंकुर बनते हैंजो हमारे समस्त आनंद को अपने में छिपाये हमारे व्यक्तित्व की भूमि में दबे पड़े हैं। वह वृद्धिजो भीतर से बाहर की ओर होती हैएकांत में ही होती है। और स्मरण रहे कि सत्य-वृद्धि भीतर से बाहर की ओर होती है। झूठे फूल ऊपर से थोपे जा सकते हैंपर असली फूल तो भीतर से ही आते हैं।

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