Type your search here:

Please Wait..

Newest Videos

ok

script async src="//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js">

Friday, 24 November 2017

Osho Hindi Prawachan ||पाप और पुण्य || Paap or Punya||osho hindi sppech

Unknown Uncategorized November 24, 2017



कोई धर्म के संबंध में पूछ रहा था। उससे मैंने कहा, 'धर्म का संबंध इससे नहीं है कि आप उसमें विश्वास करते हैं या नहीं करते। वह आपका विश्वास नहीं,आपका श्वास-प्रश्वास होतो ही सार्थक है। वह तो कुछ है- जो आप करते हैं या नहीं करते हैं- जो आप होते हैं,या नहीं होते हैं। धर्म कर्म है वक्तव्य नहीं।'
और धर्म कर्म तभी होता हैजब वह आत्मा बन गया हो। जो आप करते हेंवह आप पहले हो गया होते हें। सुवास देने के पहले फूल बन जाना आवश्यक है। फूलों की खेती की भांति आत्मा की खेती भी करनी होती है। औरआत्मा में फूलों को जगाने के लिए पर्वतों पर जाना आवश्यक नहीं है। वे तो जहां आप हैंवहीं उगाये जा सकते हैं। स्वयं के अतिरिक्त एकांत में ही पर्वत हैं और अरण्य हैं।
यह सत्य है कि पूर्ण एकांत में ही सत्य और सौंदर्य के दर्शन होते हैं। और जीवन में जो भी श्रेष्ठ है
वह उन्हें मिलता हैजो अकेले होने का साहस रखते हैं। जीवन के निगूढ़ रहस्य एकांत में ही अपने द्वार खोलते हैं। और आत्मा प्रकाश को और प्रेम को उपलब्ध होती है। और जब सब शांत और एकांत होता हैतभी वे बीज अंकुर बनते हैंजो हमारे समस्त आनंद को अपने में छिपाये हमारे व्यक्तित्व की भूमि में दबे पड़े हैं। वह वृद्धिजो भीतर से बाहर की ओर होती हैएकांत में ही होती है। और स्मरण रहे कि सत्य-वृद्धि भीतर से बाहर की ओर होती है। झूठे फूल ऊपर से थोपे जा सकते हैंपर असली फूल तो भीतर से ही आते हैं।

Osho Hindi Prawachan ||लोग कैसे अज्ञान में जीते है ||How do people live in ignorance||osho hindi sppech

Unknown Uncategorized November 24, 2017



सत्य की साधना सतत् है। श्वास-श्वास जिसकी साधना बन जाती हैवही उसे पाने का अधिकारी होता है।
सत्य की आकांक्षा अन्य आकांक्षाओं के साथ एक आकांक्षा नहीं है। अंश मन से जो उसे चाहता हैवह चाहता ही नहीं। उसे तो पूरे और समग्र मन से ही चाहना होता है। मन जब अपनी अखंडता में उसके लिए प्यासा होता हैतब वह प्यास ही सत्य तक पहुंचने का पथ बन जाती है। स्मरण रहे कि सत्य के लिए प्रज्ज्वलित प्यास ही पथ है। प्राण जब उस अनंत प्यास से भरे होते हैं और हृदय जब अज्ञात को खोजने के लिए ही धड़कता हैतभी प्रार्थना प्रारंभ होती है। श्वासें जब उसके लिए ही आती-जाती हैंतभी उस मौन अभीप्सा में ही परमात्मा की ओर पहले चरण रखे जाते हैं।
प्रेम- प्यासा प्रेम ही उसे पाने की पात्रता और अधिकारी है

Osho Hindi Prawachan ||नशा क्यों नहीं छोड़ पाते है लोग||Why do not people get addicted to drugs||osho hindi sppech

Unknown Uncategorized November 24, 2017


नशा क्यों नहीं छोड़ पाते है लोग
इस आंतरिक वृद्धि के लिए पर्वत और अरण्य में जाना आवश्यक नहीं हैपर पर्वत और अरण्य में होना अवश्य आवश्यक है। वहां होने का मार्ग प्रत्येक के ही भीतर है। दिन और रात्रि की व्यस्त दौड़ में थोड़े क्षण निकालें और अपने स्थान और समय कोऔर उससे उत्पन्न अपने तथाकथित व्यक्तित्व और 'मैंको भूल जाएं। जो भी चित्त में आयेउसे जानें कि यह मैं नहीं हूंऔर उसे बाहर फेंक दें। सब छोड़ दें- प्रत्येक चीजअपना नामअपना देशअपना परिवार-सब स्मृति से मिट जाने दें और कोरे कागज की तरह हो रहें। यही मार्ग आंतरिक एकांत और निर्जन का मार्ग है। इससे ही अंतत: आंतरिक संन्यास फलित होता है।
चित्त जब सब पकड़ छोड़ देता है- सब नाम-रूप के बंधन तोड़ देता हैतब वही आपमें शेष रह जाता हैजो आपका वास्तविक होना है। उस ज्ञान में ही धर्म है के फूल लगते हैं और जीवन परमात्मा की सुवास से भरता है।
इन थोड़े क्षणों में जो जाना जाता है- जो शांति और सौंदर्य और जो सत्य- वह आपको एक ही साथ दो तलों पर जीने की शक्ति दे देता है। फिर कुछ बांधता नहीं है और जीवन मुक्त हो जाता है। जल में होकर भी फिर जल छूता नहीं है। इस अनुभूति में ही जीवन की सिद्धि है और धर्म की उपलब्धि है।

Osho Hindi Prawachan ||दुसरो की नजर से देखोगे तो दुःख नजर ही नहीं आएगा||osho hindi sppech

Unknown Uncategorized November 24, 2017


दुसरो की नजर से देखोगे तो दुःख नजर ही नहीं आएगा
जीवन का आदर्श क्या है?' एक युवक ने पूछा है।
रात्रि घनी हो गयी है और आकाश तारों से भरा है। हवाओं में आज सर्दी है और शायद कोई कहता था कि कहीं ओले पड़े हैं। राह निर्जन है और वृक्षों के तले घना अंधेरा है।
और इस शांत शून्य-घिरी रात्रि में जीना कितना आनंदमय है! होना मात्र ही कैसा आनंद है, पर हम 'मात्र जीना' नहीं चाहते हैं! हम तो किसी आदर्श के लिए जीन चाहते हैं। जीवन को साधन बनाना चाहते हैं, जो कि स्वयं साध्य है। यह आदर्श दौड़ सब विषाक्त कर देती है। यह आदर्श का तनाव सब संगीत तोड़ देता है।
अकबर ने एक बार तानसेन से पूछा था, 'तुम अपने गुरु जैसा क्यों नहीं गा पाते हो- उनमें कुछ अलौकिक दिव्यता है।' उत्तर में तानसेन ने कहा था, 'वे केवल गाते हैं- गाने के लिए गाते हैं। और मैं-मेरे गाने में उद्देश्य है।'
किसी क्षण केवल जीकर देखो। केवल जीओ- जीवन से लड़ो मत, छीना-झपटी न करो। चुप होकर देखो, क्या होता है! जो होता है, उसे होने दो। 'जो है', उसे होने दो। अपनी तरफ से सब तनाव छोड़ दो और जीवन को बहने दो। जीवन को घटित होने दो और जो घटित होगा- मैं विश्वास दिलाता हूं- वह मुक्त कर देता है।
आदर्श का भ्रम सदियों पाले गये अंधविश्वासों में से एक है। जीवन किसी और के लिए, कुछ और के लिए नहीं, बस जीने के लिए है। जो 'किसी लिए' जीता है, वह जीता ही नहीं है। जो केवल जीता है, वही जीता है। और वही उसे पा लेता है, जो कि पाने जैसा है। वही आदर्श को भी लेता है।

Osho Hindi Prawachan |ॐ कार कोई मंत्र का रहस्य||osho hindi sppech

Unknown Uncategorized November 24, 2017



एक सराय में एक रात एक यात्री ठहरा था। वह जब वहां पहुंचा तो कुछ यात्री विदा हो रहे थे। सुबह जब वह विदा हो रहा था, तो कुछ और यात्री आ रहे थे। सराय में अतिथि आते और चले जाते, लेकिन आतिथेय वहीं का वहीं था।' एक साधु यह कह कर पूछता था कि क्या यही घटना मनुष्य के साथ प्रतिक्षण नहीं घट रही है?
मैं भी यही पूछता हूं और कहता हूं कि जीवन में अतिथि और आतिथेय को पहचान लेने से बड़ी और कोई बात नहीं है। शरीर-मन एक सराय है। उसमें विचार के, वासनाओं के, विकारों के अतिथि आते हैं। पर इन अतिथियों से पृथक भी वहां कुछ है। आतिथेय भी है। वह आतिथेय कौन है?
यह 'कौन' कैसे जाना जाये? बुद्ध ने कहा है, 'रुक जाओ।' और यह रुक जाना ही उसका जानना है। बुद्ध का पूरा वचन है, 'यह पागल मन रुकता नहीं, यदि यह रुक जाए तो वही बोधि है, वही निर्वाण है।' मन के रुकते ही आतिथेय प्रकट हो जाता है। वह शुद्ध, नित्य, बुद्ध, चैतन्य है। जो न कभी जन्मा, न मरा। न जो बद्ध है, न मुक्त होता है। जो केवल 'है', और जिसका होना परमा आनंद है।


Osho Hindi Prawachan || सत्य को झूठ बनाने वाले न्याधीश ||osho hindi sppech

Unknown Uncategorized November 24, 2017




56osho hindi speech  - सत्य को झूठ बनाने वाले सुबह हो गयी है। सूरज बदलियों में है और फुहार पड़ रही है। वर्षा ने सब गीला-गीला कर दिया है।
एक साधु पानी में भीगते मिलने आये हैं। कोई पंद्रह-बीस वर्ष हुए, तब उन्होंने आत्म-उपलब्धि के लिए गृह-त्याग किया था। त्याग तो हुआ, पर उपलब्धि नहीं हुई। इससे दुखी हैं। समाज और संबंध आत्म-लाभ में बाधा समझे जाते हैं। ऐसी मान्यता ने व्यर्थ में अनेकों को जीवन से तोड़ दिया है।
एक कहानी उनसे मैंने कही। एक पागल स्त्री थी। उसे पूर्ण विश्वास था कि उसका शरीर स्थूल, भौतिक नहीं है। वह अपने शरीर को दिव्य-काया मानती थी। कहती थी कि उसकी काया से और सुंदर काया पृथ्वी पर दूसरी नहीं है। एक दिन उस स्त्री को बड़े आदमकद आईने के सामने लाया गया। उसने अपने शरीर को उस दर्पण में देखा और देखते ही उसके क्रोध की सीमा न रही। उसने पास रखी कुर्सी उठाकर दर्पण पर फेंकी। दर्पण टुकड़े-टुकड़े हो गया, तो उसने सुख की सांस ली। दर्पण फोड़ने का कारण पूछा तो बोली थी कि वह मेरे शरीर को भौतिक किये दे रहा है। मेरे सौंदर्य को वह विकृत कर रहा था।
समाज और संबंध दर्पण से ज्यादा नहीं हैं। जो हममें होता है, वे केवल उसे ही प्रतिबिंबित कर देते हैं। दर्पण तोड़ना जैसे व्यर्थ है, संबंध छोड़ना भी वैसे ही व्यर्थ है। दर्पण को नहीं अपने को बदलना है। जो जहां है, वहीं यह बदलाहट हो सकती है। यह क्रांति केंद्र से शुरू होती है। परिधि पर काम करना व्यर्थ ही समय खोना है।
स्व पर सीधे ही काम शुरू कर देना है। समाज और संबंध कहीं भी बाधा नहीं हैं। बाधाएं कोई हैं, तो स्वयं में है।न्याधीश  - osho hindi  pravachan

55osho hindi speech - जीवन का लक्ष्य क्या है part 1 - by osho hindi pravachan

Unknown Uncategorized November 24, 2017
55osho hindi speech  - जीवन का लक्ष्य क्या है part 1 -  by osho hindi pravachan

54Osho hindi speech - कुंडलिनी ऊर्जा की यात्रा

Unknown Uncategorized November 24, 2017
54Osho hindi speech -  कुंडलिनी ऊर्जा की यात्रा

46Osho जो जागने को तयार है उनको जरा सी चोट ही काफी है Jo Jagne Ko Tyaar Hai Usko Jra Si Chot Hi Kafi

Unknown Uncategorized November 24, 2017
46Osho जो जागने को तयार है उनको जरा सी चोट ही काफी है Jo Jagne Ko Tyaar Hai Usko Jra Si Chot Hi Kafi

50Osho hindi pravachan on Jiddu Krishnamurti

Unknown Uncategorized November 24, 2017
50Osho hindi pravachan on Jiddu Krishnamurti
Unknown Uncategorized November 24, 2017
4O7SHO Amrit Varsha - Part 1 [Hindi]

40Osho - What is life - ओशो - जीवन क्या है

Unknown Uncategorized November 24, 2017
40Osho - What is life - ओशो - जीवन क्या है 

49OSHO HINDI ओशो जाने पिछले जन्म के कर्मो का रहस्य !

Unknown Uncategorized November 24, 2017
49OSHO HINDI   à¤“शो  जाने पिछले जन्म के कर्मो का रहस्य  !

48OSHO Amrit Varsha - Part 3 [Hindi]

Unknown Uncategorized November 24, 2017
48OSHO Amrit Varsha - Part 3 [Hindi]

43Osho ना यहाँ कोई दाता है ना यहाँ कोई भीखारी Na Yaha Koi daata hai, Na Yahan koi bikhari

Unknown Uncategorized November 24, 2017
43Osho ना यहाँ कोई दाता है ना यहाँ कोई भीखारी Na Yaha Koi daata hai, Na Yahan koi bikhari

42Osho नदी से सीखो - Nadi Se Sikho - osho hindi speech

Unknown Uncategorized November 24, 2017
42Osho नदी से सीखो - Nadi Se Sikho - osho hindi speech

41osho - बुल्लेह शाह कहते है कि मैं की जाना मैं कौन हूँ - osho hindi speech - pravachan with music

Unknown Uncategorized November 24, 2017
41osho - बुल्लेह शाह कहते है कि मैं की जाना मैं कौन हूँ - osho hindi speech - pravachan with music

53Osho hindi speech - अगला जनम अपनी मर्ज़ी से चुनने का सूत्र

Unknown Uncategorized November 24, 2017

52Osho hindi speech - real love ओशो - वास्तविक प्रेम क्या है ! PREM

Unknown Uncategorized November 24, 2017

47OSHO Amrit Varsha - Part 3 [Hindi] (1)

Unknown Uncategorized November 24, 2017
47OSHO Amrit Varsha - Part 3 [Hindi] (1)

45sho वासना पराथना का बीज है । Vasna Prathna ka Beej haiJanuary 5, 2017

Unknown Uncategorized November 24, 2017
45sho वासना पराथना का बीज है ।   Vasna Prathna ka Beej haiJanuary 5, 2017

44osho तर्क से भरा हुआ मन हमेशा चुनाव करता है । Tarak se bhra hua man hmesha chunaav karta hai

Unknown Uncategorized November 24, 2017
44osho तर्क से भरा हुआ मन हमेशा चुनाव करता है । Tarak se bhra hua man hmesha chunaav karta hai

51Osho Hindi Prawachan - Paap or Punya

Unknown Uncategorized November 24, 2017
51Osho Hindi Prawachan - Paap or Punya

39osho hindi pravachan तुलना करोगे तो उलझते जाओगे Saint Osho

Unknown Uncategorized November 24, 2017
39osho hindi pravachan  तुलना करोगे तो उलझते जाओगे Saint Osho

29Osho Hindi - देवताओं और प्रेत का शरीर में प्रवेश किन परिस्तिथियों में होता है

Unknown Uncategorized November 24, 2017
29Osho Hindi - देवताओं और प्रेत का शरीर में प्रवेश किन परिस्तिथियों में होता है 

38Osho Hindi Jokes, Hanse Ki Do Vidhiyan

Unknown Uncategorized November 24, 2017
38Osho Hindi Jokes, Hanse Ki Do Vidhiyan

38Osho Hindi Jokes, Hanse Ki Do Vidhiyan

Unknown Uncategorized November 24, 2017
38Osho Hindi Jokes, Hanse Ki Do Vidhiyan

39osho hindi pravachan तुलना करोगे तो उलझते जाओगे Saint Osho

Unknown Uncategorized November 24, 2017
39osho hindi pravachan  तुलना करोगे तो उलझते जाओगे Saint Osho

28Osho Hindi - कामवासना दबाएं या भोगें

Unknown Uncategorized November 24, 2017
28Osho Hindi - कामवासना दबाएं या भोगें

26OSHO HINDI ओशो जाने पिछले जन्म के कर्मो का रहस्य !

Unknown Uncategorized November 24, 2017
26OSHO HINDI   ओशो  जाने पिछले जन्म के कर्मो का रहस्य  !

37Osho hindi discourse on how we can talk to Soul and Spirit -- Spiritual Journey

Unknown Uncategorized November 24, 2017
37Osho hindi discourse  on  how we can talk to Soul and Spirit -- Spiritual Journey

35osho hindi best lecture osho hindi pravachan

Unknown Uncategorized November 24, 2017
35osho hindi best lecture osho hindi pravachan

30Osho Hindi - मनुष्य के 7 शरीरों की व्याख्या - मोक्ष पांचवें शरीर की अवस्था का अनुभव है -

Unknown Uncategorized November 24, 2017
30Osho Hindi - मनुष्य के 7 शरीरों की व्याख्या - मोक्ष पांचवें शरीर की अवस्था का अनुभव है -

36Osho hindi discourse on how we can talk to Soul and Spirit -- Spiritual Journey

Unknown Uncategorized November 24, 2017
36Osho hindi discourse  on  how we can talk to Soul and Spirit -- Spiritual Journey

34osho Hindi best lecture osho hindi pravachan Punarjanm ko jaane

Unknown Uncategorized November 24, 2017
34osho Hindi best lecture osho hindi pravachan Punarjanm ko jaane

33OSHO Hindi best lecture osho hindi pravachan jaldi Jalaya Dafnaya Kyu Jata he

Unknown Uncategorized November 24, 2017
33OSHO Hindi best lecture osho hindi pravachan jaldi Jalaya Dafnaya Kyu Jata he

32OSHO Hindi best lecture osho hindi pravachan Hosh Me Janm Lena

Unknown Uncategorized November 24, 2017
32OSHO Hindi best lecture osho hindi pravachan Hosh Me Janm Lena

31osho Hindi best lecture osho hindi pravachan Aatma ke rahasya

Unknown Uncategorized November 24, 2017
31osho Hindi best lecture osho hindi pravachan Aatma ke rahasya

27OSHO Hindi - Kya Punarjanam hota hai पुनरजनम

Unknown Uncategorized November 24, 2017
27OSHO Hindi - Kya Punarjanam hota hai पुनरजनम

25Osho gare pani peth third eye

Unknown Uncategorized November 24, 2017
25Osho gare pani peth third eye

22Osho Best Speech in hindi -- सद्गुरु से सामना सत्संग हे -- sadguru se samna satsang hota hai.

Unknown Uncategorized November 24, 2017
22Osho Best Speech in hindi -- सद्गुरु से सामना सत्संग हे -- sadguru se samna satsang hota hai.

24OSHO- Dhyan Ka Sutra

Unknown Uncategorized November 24, 2017
24OSHO- Dhyan Ka Sutra

23osho Best Speech Power Of Our thoughts HINDI

Unknown Uncategorized November 24, 2017
23osho Best Speech Power Of Our thoughts HINDI

20OSHO and Pandit too funny. ओशो और पंडित TOO FUNNY

Unknown Uncategorized November 24, 2017
20OSHO and Pandit too funny. ओशो और पंडित TOO FUNNY

19OSHO Amrit Varsha - Part 4 [Hindi]

Unknown Uncategorized November 24, 2017
19OSHO Amrit Varsha - Part 4 [Hindi]

18Osho - Main Harijano ke ghar kyon nahi theherta - (Hindi) - मैं हरिजनों के घर क्यों नहीं ठहरता

Unknown Uncategorized November 24, 2017
18Osho - Main Harijano ke ghar kyon nahi theherta - (Hindi) - मैं हरिजनों के घर क्यों नहीं ठहरता

21OSHO Ateet Aur Bhavishya Se Mukti

Unknown Uncategorized November 24, 2017
21OSHO Ateet Aur Bhavishya Se Mukti

14Hindi Speech Now About Death Hindi Pravachan

Unknown Uncategorized November 24, 2017
14Hindi Speech Now About Death Hindi Pravachan

15hindi speech on Hindu Muslim hindi pravachan

Unknown Uncategorized November 24, 2017
15hindi speech on Hindu Muslim hindi pravachan

17Importance of Silence - Osho Hindi Lecture - मौन का महत्त्व

Unknown Uncategorized November 24, 2017
17Importance of Silence - Osho Hindi Lecture - मौन का महत्त्व

16Hindi Speech Prem Kya Hei Hindi Pravachan On Love

Unknown Uncategorized November 24, 2017
16Hindi Speech Prem Kya Hei Hindi Pravachan On Love

11hindi speech jeevan kranti hindi pravachan

Unknown Uncategorized November 24, 2017
11hindi speech jeevan kranti hindi pravachan

12Hindi speech Jhutaa Aadar hindi pravachan (Kadve Pravachan)

Unknown Uncategorized November 24, 2017
12Hindi speech Jhutaa  Aadar hindi pravachan (Kadve Pravachan)

13hindi speech Jigyasa nahi hoti Satya Janne ki

Unknown Uncategorized November 24, 2017
13hindi speech Jigyasa nahi hoti Satya Janne ki

15hindi speech on Hindu Muslim hindi pravachan

Unknown Uncategorized November 24, 2017
15hindi speech on Hindu Muslim hindi pravachan

8Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on inner Space -- Spiritual Journey

Unknown Uncategorized November 24, 2017
8Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on inner Space -- Spiritual Journey

9Hindi Speech Here and Now hindi pravachan ( Vartman mein Jeena)

Unknown Uncategorized November 24, 2017
9Hindi Speech Here and Now hindi pravachan ( Vartman mein Jeena)

10Hindi Speech Here and Now hindi pravachan

Unknown Uncategorized November 24, 2017
10Hindi Speech Here and Now hindi pravachan

5Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on girl beauty-- Spiritual Journey

Unknown Uncategorized November 24, 2017
5Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on girl beauty-- Spiritual Journey

7Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on Hynotism -- Spiritual Journey

Unknown Uncategorized November 24, 2017
7Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on Hynotism -- Spiritual Journey

8Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on inner Space -- Spiritual Journey

Unknown Uncategorized November 24, 2017
8Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on inner Space -- Spiritual Journey

9Hindi Speech Here and Now hindi pravachan ( Vartman mein Jeena)

Unknown Uncategorized November 24, 2017
9Hindi Speech Here and Now hindi pravachan ( Vartman mein Jeena)

6Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on Girls Nature --Spiritual Journey

Unknown Uncategorized November 24, 2017
6Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on Girls Nature --Spiritual Journey

4Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on girl beauty-- Spiritual Journey

Unknown Uncategorized November 24, 2017
4Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on girl beauty-- Spiritual Journey

3Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on ego --अहंकार को कैसे नष्ट करे -- Spiritual Journey

Unknown Uncategorized November 24, 2017
3Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on ego --अहंकार को कैसे नष्ट करे  -- Spiritual Journey

2Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on Death -- Spiritual Joureny

Unknown Uncategorized November 24, 2017
2Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on Death  --  Spiritual Joureny

1Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on Telepathy -- Spiritual Journey

Unknown Uncategorized November 24, 2017
1Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse  on Telepathy -- Spiritual Journey

Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on Death Prediction -- Spiritual Joureny

Unknown Uncategorized November 24, 2017
Bhagwan shree rajneesh osho hindi discourse on Death Prediction --  Spiritual Joureny

divyatava ke

Unknown Uncategorized November 24, 2017
divyatava ke

Boost Your Serotonin, Dopamine _ Endorphin Release - Binaural Beats + Isochronic Tones

Unknown Uncategorized November 24, 2017
Boost Your Serotonin, Dopamine _ Endorphin Release - Binaural Beats + Isochronic Tones

devata aur shetan ka chitra

Unknown Uncategorized November 24, 2017
devata aur shetan ka chitra

Best Osho Hindi Speech on Good Thoughts

Unknown Uncategorized November 24, 2017
Best Osho Hindi Speech on Good Thoughts

daman karna kya hai

Unknown Uncategorized November 24, 2017
daman karna kya hai

Best Hindi Speech ( ASTAL BODY Yatra) PART 5

Unknown Uncategorized November 24, 2017
Best Hindi Speech ( ASTAL BODY Yatra) PART 5

Best Hindi Pravachan (Hindi Speech) DUKH SE SUkh KI Aur

Unknown Uncategorized November 24, 2017
Best Hindi Pravachan (Hindi Speech) DUKH SE SUkh KI Aur

Best Hindi Pravachan (Hindi Speech) SANKALP SHAKTI

Unknown Uncategorized November 24, 2017
Best Hindi Pravachan (Hindi Speech) SANKALP SHAKTI

Best hindi pravachan( Hindi Lectures) Ramayan Ke secrets

Unknown Uncategorized November 24, 2017
Best hindi pravachan( Hindi Lectures) Ramayan Ke secrets

Best HIndi Speech ( Astral Body Ke Rahasya) PART 6

Unknown Uncategorized November 24, 2017
Best HIndi Speech ( Astral Body Ke Rahasya) PART 6

Best Hindi Pravachan (Hindi pravachan) Sakshi Or Tathata||साक्षी और तथाता ||Witness and tiger

Unknown Uncategorized November 24, 2017


Best Hindi Pravachan (Hindi pravachan) Sakshi Or Tathata

अंधकार की चिंता छोड़ो और प्रकाश को प्रदीप्त करो। जो अंधकार का ही विचार करते रहते हैंवे प्रकाश तक कभी नहीं पहुंच पाते हैं।
जीवन में बहुत अंधकार है। और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुंचने और उसे पाने की आकांक्षा थीवह क्रमश: क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप मानता हूं। यह मनुष्य का स्वयं अपने ही प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किये गये अपराधों का जन्म इस मूल-पाप से ही होता है। यह स्मरण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता हैवह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किंतुकुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने के लिये उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बन जाता है। यह भी भूल है। अंधकार को मान लेने वाला भी भूल में है। न अंधकार को मानना हैन उससे लड़ना है। जो जानता हैवह प्रकाश को जलाने की आयोजना करता है। अंधकार की अपनी सत्ता नहीं है। वह प्रकाश का अभाव मात्र है। प्रकाश के आते ही वह नहीं पाया जाता है। और ऐसा ही अशुभ हैऐसी ही अनीति हैऐसा ही अधर्म है। अशुभ कोअनीति कोअधर्म को मिटाना नहींशुभ कानीति काधर्म का दिया जलाना ही पर्याप्त है। धर्म की ज्योति ही अधर्म की मृत्यु है।
अंधकार से लड़ना अभाव से लड़ना है। वह विक्षिप्तता है। लड़ना हैतो प्रकाश पाने के लिये लड़ो- जो प्रकाश पा लेता हैवह अंधकार को मिटा ही देता है।

Best Hindi Pravachan (Hindi Pravachan) dhyaan VIDHIYAA||ध्यान विद्या

Unknown Uncategorized November 24, 2017




Best Hindi Pravachan (Hindi Pravachan) dhyaan VIDHIYAA||ध्यान विद्या

सत्य एक है। उस तक पहुंचने के द्वार अनेक हो सकते हैं। परजो द्वार के मोह में पड़ जाता हैवह द्वार पर ही ठहर जाता है। और सत्य के द्वार उसके लिए कभी नहीं खुलते हैं।
सत्य सब जगह है। जो भी है
सभी सत्य है। उसकी अभिव्यक्तियां अनंत हैं। वह सौंदर्य की भांति है। सौंदर्य कितने रूपों में प्रकट होता हैलेकिन इससे क्या वह भिन्न-भिन्न हो जाता है! जो रात्रि तारों में झलकता है और जो फूलों में सुगंध बनकर झरता है और जो आंखों से प्रेम में प्रकट होता है- वह क्या अलग-अलग हैरूप अलग होंपर जो उनमें स्थापित होता हैवह तो एक ही है।
किंतु जो रूप पर रुक जाता हैवह आत्मा को नहीं जान पाता और जो सुंदर पर ठहर जाता हैवह सौंदर्य तक नहीं पहुंच पाता है।
ऐसे हीजो शब्द में बंध जाते हैंवे सत्य से वंचित रह जाते हैं।
जो जानते हैंवे राह के अवरोधों को सीढि़यां बना लेते हैं और जो नहीं जानते,उनके लिए सीढि़यां भी अवरोध बन जाती हैं।

बच्चो के बिगड़ने का क्या कारण है ||Baccho ke Bigadne ke karan

Unknown Uncategorized November 24, 2017



बच्चो के बिगड़ने का क्या कारण है ||Baccho ke Bigadne ke karan
जीवन-सत्य संयम और संगीत से मिलता है। जो किसी भी दिशा में अति करते हैंवे मार्ग से भटक जाते हैं। मनुष्य का मन अतियों में डोलता और चलता है। एक अति से दूसरी अति पर चला जाना उसे बहुत आसान है। ऐसा उसका स्वभाव ही है। शरीर के प्रति जो बहुत आसक्त हैवही व्यक्ति प्रतिक्रिया में शरीर के प्रति बहुत कठोर और क्रूर हो सकता है। इस कठोरता और क्रूरता में भी वही आसक्ति प्रच्छन्न होती है। और इसलिए जैसे वह पहले शरीर से बंधा थावैसा अब भी- बिलकुल विपरीत दिशा से शरीर से बंधा होता है। शरीर का ही चिंतन पहले थाशरीर का ही चिंतन अब भी होता है। इस भांति विपरीत अति पर जाकर मन धोखा दे देता है और उसकी जो मूल वृत्ति थीउसे बचा लेता है। मन का सदा अतियों में चलने का मूल कारण यही है। मन की इस विपरीत अतियों में चलने की प्रवृत्ति को मैं असंयम कहता हूं।संसार के प्रति आसक्ति और विरक्ति का मध्य खोजने और उसमें स्थिर होने से संन्यास का संयम उपलब्ध होता है। इस भांति जो समस्त अतियों में संयम को साधता हैवह अतियों के अतीत हो जाता है और उसके जीवन में निर्वाण के संगीत का अवतरण होता है।फिर संयम किसे कहता हूं? दो अतियों के बीच मध्य खोजने और उस मध्य में थिर होने का नाम संयम है। जहां संयम होता है, जीवन वहीं संगीत से भर जाता है। संगीत संयम का फल है।
शरीर के प्रति राग और विराग का मध्य खोजने और उसमें स्थिर होने से वीतरागी का संयम उपलब्ध होता है।संसार के प्रति आसक्ति और विरक्ति का मध्य खोजने और उसमें स्थिर होने से संन्यास का संयम उपलब्ध होता है। इस भांति जो समस्त अतियों में संयम को साधता है, वह अतियों के अतीत हो जाता है और उसके जीवन में निर्वाण के संगीत का अवतरण होता है।
मनुष्य अतियों में जीता है और यदि अतियां न होंतो वह विलीन हो जाता है। उसके कोलाहल के विलीन हो जाने पर सहज ही वह संगीत सुनाई पड़ने लगता हैजो कि सदा सदैव से ही स्वयं के भीतर निनादित हो रहा है। स्वयं का वह संगीत ही निर्वाण हैमोक्ष हैपरम-ब्रह्मं है।
पानी में डूबने से बचना हैतो आग की लपटों में स्वयं को डाल देना-बचाव का कोई मार्ग नहीं है।

Best Hindi Pravachan ( AHANKAR Ko Kese Khatm kare)||अहंकार को कैसे खत्म करे||How to eliminate ego

Unknown Uncategorized November 24, 2017

अहंकार को कैसे खत्म करे

Best Hindi Pravachan ( AHANKAR Ko Kese Khatm kare)अंधकार से भरी रात्रि में प्रकाश की एक किरण का होना भी सौभाग्य है, क्योंकि जो उसका अनुसरण करते हैं, वे प्रकाश के स्रोत तक पहुंच जाते हैं।
एक राजा ने किसी कारण नाराज हो अपने वजीर को एक बहुत बड़ी मीनार के ऊपर कैद कर दिया था। एक प्रकार से यह अत्यंत कष्टप्रद मृत्यु दण्ड ही था। न तो उसे कोई भोजन पहुंचाया जाता था और न उस गगनचुंबी मीनार से कूदकर ही उसके भागने की उसकी पत्नी ने बहुत सोचा, लेकिन उस ऊंची मीनार पर रेशम का पतला सूत भी पहुंचाने का कोई उपाय उसकी समझ में नहीं आया। उसने एक फकीर को पूछा। फकीर ने कहा, 'भृंग नाम के कीड़े को पकड़ो। उसके पैर में रेशम के धागे को बांध दो और उसकी मूछों पर शहद की एक बूंद रखकर उसे मीनार पर, उसका मुंह चोटी की ओर करके छोड़ दो।' उसी रात्रि यह किया गया। वह कीड़ा सामने मधु की गंध पाकर उसे पाने के लोभ में धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगा। उसने अंतत: एक लंबी यात्रा पूरी कर ली और उसके साथ रेशम का एक छोर मीनार पर बंद कैदी के हाथ में पहुंच गया। वह रेशम का पतला धागा उसकी मुक्ति और जीवन बन गया। क्योंकि, उससे फिर सूत का धागा बांधकर ऊपर पहुंचाया गया, फिर सूत के धागे से डोरी पहुंच गई और फिर डोरी से मोटा रस्सा पहुंच गया और रस्से के सहारे वह कैद के बाहर हो गया।
इसलिए, मैं कहता हूं कि सूर्य तक पहुंचने के लिये प्रकाश की एक किरण भी बहुत है। और वह किरण किसी को पहुंचानी भी नहीं है। वह प्रत्येक के पास है। जो उस किरण को खोज लेते हैं, वे सूर्य को भी पा लेते हैं।
वह वजीर जब कैद करके मीनार की तरफ ले जाया जा रहा था, तो लोगों ने देखा कि वह जरा भी चिंतित और दुखी नहीं है। विपरीत, वह सदा की भांति ही आनंदित और प्रसन्न है। उसकी पत्नी ने रोते हुए उसे विदा दी और उससे पूछा कि वह प्रसन्न क्यों है! उसने कहा कि यदि रेशम का एक अत्यंत पतला सूत भी मेरे पास पहुंचाया जा सका, तो मैं स्वतंत्र हो जाऊंगा और क्या इतना-सा काम तुम नहीं कर सकोगी?

Best Hindi Pravachan (Hindi Lecures) Sab Dhyaan Sadhana Jhooti hoti he|||सब ध्यान साधना झूठी है

Unknown Uncategorized November 24, 2017




Best Hindi Pravachan (Hindi Lecures) Sab Dhyaan Sadhana Jhooti hoti he||सब ध्यान साधना झूठी है

दोपहर तप गई है। पलाश के वृक्षों पर फूल अंगारों की तरह चमक रहे हैं।
एक सुनसान रास्ते से गुजरता हूँ। बांसों का झुरमुट है और उनकी छाया भली लगती है।
कोई परिचित चिड़िया गीत गाती है। उसके निमंत्रण को मान वहीं रुक जाता हूँ।
एक व्यक्ति साथ है। पूछ रहे हैं, 'क्रोध को कैसे जीतें, काम को कैसे जीते?' यह बात तो अब रोज-रोज पूछी जाती है। इसके पूछने में ही भूल है, यही उनसे कहता हूँ।
समस्या जीतने की है ही नहीं। समस्या मात्र जानने की है। हम न क्रोध को जानते हैं और न काम को जानते हैं। यह अज्ञान ही हमारी पराजय है।
जानना जीतना हो जाता है। क्रोध होता है, काम होता है, तब हम नहीं होते हैं। होश नहीं होता है, इसलिए हम नहीं होते हैं। इस मूच्र्छा में जो होता है, वह बिलकुल यांत्रिक है। मूच्र्छा टूटते ही पछतावा आता है, पर वह व्यर्थ है; क्योंकि जो पछता रहा है, वह काम के पकड़ते ही पुन: सो जाने को है। वह न सो पाए- अमूच्र्छा बनी रहे, जागृति, सम्यक-स्मृति बनी रहे, तो पाया जाता है कि न क्रोध है, न काम है। यांत्रिकता टूट जाती है और फिर किसी को जीतना नहीं पड़ता है। दुशमन पाये ही नहीं जाते हैं।
एक प्रतीक कथा से समझे। अंधेरे में कोई रस्सी साँप दिखती है। कुछ उसे देखकर भागते हैं, कुछ लड़ने की तैयारी करते हैं। दोनों ही भूल में हैं, क्योंकि दोनों ही उसे स्वीकार कर लेते हैं। कोई निकट जाता है और पाता है कि साँप है ही नहीं। उसे कुछ करना नहीं होता, केवल निकट भर जाना होता है।

Best Hindi Pravachan ( hindi Speech) SANSAR Brahm hai ||संसार ब्रह्म है

Unknown Uncategorized November 24, 2017




Best Hindi Pravachan ( hindi Speech) SANSAR Brahm hai || संसार ब्रह्म है 

Best Hindi Pravachan ( hindi Speech) Astal Body

Unknown Uncategorized November 24, 2017
Best Hindi Pravachan ( hindi  Speech) Astal  Body 

कल रात्रि कोई महायात्रा पर निकल गया है। उसके द्वार पर आज रुदन है।
ऐसे क्षणों में बचपन की एक स्मृति मन में दुहर जाती है। पहली बार मरघट जाना हुआ था। चिता जल गई थी और लोग छोटे-छोटे झुंड बनाकर बातें कर रहे थे। गांव के एक कवि ने कहा था 'मैं मृत्यु से नहीं डरता हूं। मृत्यु तो मित्र है।'
यह बात तब से अनेक रूपों में अनेक लोगों से सुनी है। जो ऐसा कहते हैं, उनकी आंखों में भी देखा है और पाया है कि भय से ही ऐसी अभय की बातें निकल
जिस व्यक्ति को हमने अपना 'मैं' जाना है, वही टूटता है, उसकी ही मृत्यु है। वह है नहीं, इसलिए टूट जाता है। वह केवल सांयोगिक है : कुछ तत्वों का जोड़ है, जोड़ खुलते ही बिखर जाता है। यही है मृत्यु। और इसलिए व्यक्तित्व के साथ स्वरूप के साथ एक जानना जब तक है, तब तक मृत्यु है।
व्यक्तित्व से गहरे उतरें, स्वरूप पर पहुंचे और अमृत उपलब्ध हो जाता है।
इस यात्रा का- व्यक्तित्व से स्वरूप तक की यात्रा का मार्ग धर्म है।
समाधि में, मृत्यु से परिचय हो जाता है।
सूरज उगते ही जैसे अंधेरा 'न' हो जाता है, वैसे ही समाधि उपलब्ध होते ही मृत्यु 'न' हो जाती है।ती हैं।
मृत्यु के अच्छे नाम देने से ही कुछ परिवर्तन नहीं हो जाता है। वस्तुत: डर मृत्यु का नहीं है, डर अपरिचय का है। जो अज्ञात है, वह भय पैदा करता है। मृत्यु से परिचित होना जरूरी है। परिचय अभय में ले आता है। क्यों? क्योंकि परिचय से ज्ञात होता है कि 'जो है', उसकी मृत्यु नहीं है।
व्यक्तित्व से गहरे उतरें, स्वरूप पर पहुंचे और अमृत उपलब्ध हो जाता है।
इस यात्रा का- व्यक्तित्व से स्वरूप तक की यात्रा का मार्ग धर्म है।
समाधि में, मृत्यु से परिचय हो जाता है।
सूरज उगते ही जैसे अंधेरा 'न' हो जाता है, वैसे ही समाधि उपलब्ध होते ही मृत्यु 'न' हो जाती है।
मृत्यु न तो शत्रु है, न मित्र है। मृत्यु है ही नहीं। न उससे भय करना है, न उससे अभय होना है। केवल उसे जानना है। उसका अज्ञान भय है, उसका ज्ञान अभय है।

Best Hindi pravachan ( Hindi Speech) Deeapk ka gyan||दीपक का ज्ञान

Unknown Uncategorized November 24, 2017






अंधकार से भरी रात्रि में प्रकाश की एक किरण का होना भी सौभाग्य है, क्योंकि जो उसका अनुसरण करते हैं, वे प्रकाश के स्रोत तक पहुंच जाते हैं।
एक राजा ने किसी कारण नाराज हो अपने वजीर को एक बहुत बड़ी मीनार के ऊपर कैद कर दिया था। एक प्रकार से यह अत्यंत कष्टप्रद मृत्यु दण्ड ही था। न तो उसे कोई भोजन पहुंचाया जाता था और न उस गगनचुंबी मीनार से कूदकर ही उसके भागने की कोई संभावना थी।
वह वजीर जब कैद करके मीनार की तरफ ले जाया जा रहा था, तो लोगों ने देखा कि वह जरा भी चिंतित और दुखी नहीं है। विपरीत, वह सदा की भांति ही आनंदित और प्रसन्न है। उसकी पत्नी ने रोते हुए उसे विदा दी और उससे पूछा कि वह प्रसन्न क्यों है! उसने कहा कि यदि रेशम का एक अत्यंत पतला सूत भी मेरे पास पहुंचाया जा सका, तो मैं स्वतंत्र हो जाऊंगा और क्या इतना-सा काम तुम नहीं कर सकोगी?
उसकी पत्नी ने बहुत सोचा, लेकिन उस ऊंची मीनार पर रेशम का पतला सूत भी पहुंचाने का कोई उपाय उसकी समझ में नहीं आया। उसने एक फकीर को पूछा। फकीर ने कहा, 'भृंग नाम के कीड़े को पकड़ो। उसके पैर में रेशम के धागे को बांध दो और उसकी मूछों पर शहद की एक बूंद रखकर उसे मीनार पर, उसका मुंह चोटी की ओर करके छोड़ दो।' उसी रात्रि यह किया गया। वह कीड़ा सामने मधु की गंध पाकर उसे पाने के लोभ में धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगा। उसने अंतत: एक लंबी यात्रा पूरी कर ली और उसके साथ रेशम का एक छोर मीनार पर बंद कैदी के हाथ में पहुंच गया। वह रेशम का पतला धागा उसकी मुक्ति और जीवन बन गया। क्योंकि, उससे फिर सूत का धागा बांधकर ऊपर पहुंचाया गया, फिर सूत के धागे से डोरी पहुंच गई और फिर डोरी से मोटा रस्सा पहुंच गया और रस्से के सहारे वह कैद के बाहर हो गया।
इसलिए, मैं कहता हूं कि सूर्य तक पहुंचने के लिये प्रकाश की एक किरण भी बहुत है। और वह किरण किसी को पहुंचानी भी नहीं है। वह प्रत्येक के पास है। जो उस किरण को खोज लेते हैं, वे सूर्य को भी पा लेते हैं।
मनुष्य के भीतर जो जीवन है, वह अमृत्व की किरण है- जो बोध है, वह बुद्धत्व की बूंद है और जो आनंद है, वह सच्चिदानंद की झलक है।

संयम

Unknown Uncategorized November 24, 2017
संयम क्या है? अस्पर्श-भाव संयम है। तटस्थ साक्षी-भाव संयम है। संसार में 'होना' और साथ ही 'नहीं-होना' संयम है।
एक बार कन्फ्यूशियस से येन-हुई ने पूछा, ''मैं मन पर संयम रखने के लिए क्या करूं?'' कन्फ्यूशियस ने कहा, ''तुम कानों से नहीं सुनते, मन से सुनते हो; मन से भी नहीं सुनते, अपनी आत्मा से सुनते हो। प्रयत्न करो कि केवल कानों से ही सुनोगे। मन को कानों की सहायता करने की जरूरत न पड़े। तब शून्यावस्था में आत्मा बाह्य प्रभावों को अक्रियाता से ही ग्रहण करेगी। ऐसी समाधि में ही संयम है। और ऐसी अवस्था में ही भगवान का निवास है।''
मैं आंखों से देखता हूं, कानों से सुनता हूं, पैरों से चलता हूं- और फिर भी 'मैं' सबसे दूर हूं, वहां न देखना है, न सुनना है, न चलना है। इंद्रियों से जो भी आता हो, उससे अलिप्त और तटस्थ खड़े होना सीखो। इस भांति अस्पर्श में प्रतिष्ठित हो जाने का नाम संयम है। और, संयम सत्य का द्वार है।येन-हुई ने कहा, ''किंतु इस भांति तो मरा व्यक्तित्व ही खो जाएगा? क्या शून्यावस्था का यही अर्थ नहीं है?'' कन्फ्यूशियस बोला, ''हां, यही अर्थ है। सामने, उस झरोखे को देखते हो? इसके होने से यह कक्ष प्राकृतिक सौंदर्य से जगमगा उठा है। परंतु, प्राकृतिक दृश्य बाहर ही हैं। चाहो तो अपने कानों और अपनी आंखों का प्रयोग अपने अंतर को इसी भांति ज्योतित करने के लिए कर सकते हो। इंद्रियों को झरोखा बनाओ और स्वयं शून्य हो रहो। इस अवस्था को ही मैं संयम कहता हूं।''

Monday, 20 November 2017

अच्छे विचार||Good thoughts

Unknown Uncategorized November 20, 2017





Good thoughts

Bottom 3