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Friday, 24 November 2017

Osho Hindi Prawachan ||नशा क्यों नहीं छोड़ पाते है लोग||Why do not people get addicted to drugs||osho hindi sppech

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Unknown Uncategorized November 24, 2017


नशा क्यों नहीं छोड़ पाते है लोग
इस आंतरिक वृद्धि के लिए पर्वत और अरण्य में जाना आवश्यक नहीं हैपर पर्वत और अरण्य में होना अवश्य आवश्यक है। वहां होने का मार्ग प्रत्येक के ही भीतर है। दिन और रात्रि की व्यस्त दौड़ में थोड़े क्षण निकालें और अपने स्थान और समय कोऔर उससे उत्पन्न अपने तथाकथित व्यक्तित्व और 'मैंको भूल जाएं। जो भी चित्त में आयेउसे जानें कि यह मैं नहीं हूंऔर उसे बाहर फेंक दें। सब छोड़ दें- प्रत्येक चीजअपना नामअपना देशअपना परिवार-सब स्मृति से मिट जाने दें और कोरे कागज की तरह हो रहें। यही मार्ग आंतरिक एकांत और निर्जन का मार्ग है। इससे ही अंतत: आंतरिक संन्यास फलित होता है।
चित्त जब सब पकड़ छोड़ देता है- सब नाम-रूप के बंधन तोड़ देता हैतब वही आपमें शेष रह जाता हैजो आपका वास्तविक होना है। उस ज्ञान में ही धर्म है के फूल लगते हैं और जीवन परमात्मा की सुवास से भरता है।
इन थोड़े क्षणों में जो जाना जाता है- जो शांति और सौंदर्य और जो सत्य- वह आपको एक ही साथ दो तलों पर जीने की शक्ति दे देता है। फिर कुछ बांधता नहीं है और जीवन मुक्त हो जाता है। जल में होकर भी फिर जल छूता नहीं है। इस अनुभूति में ही जीवन की सिद्धि है और धर्म की उपलब्धि है।

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